DURG / CHHATTISGARH
सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के दावे आमने-सामने
हेडलाइंस
- दुर्ग जिला अस्पताल में 20 वर्षीय युवती की मौत।
- सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी दीपिका गाड़ा।
- परिजनों ने समय पर रक्त उपलब्ध नहीं कराने का लगाया आरोप।
- अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार।
- मामले की जांच के निर्देश, रिपोर्ट का इंतजार।
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। युवती की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि शरीर में खून की भारी कमी होने के बावजूद समय पर रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण उसकी जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला।
परिजनों ने उपचार में लापरवाही का लगाया आरोप
मृतका के परिजनों का कहना है कि दीपिका गाड़ा लंबे समय से सिकल सेल एनीमिया की बीमारी से पीड़ित थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद चिकित्सकों ने रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई थी, लेकिन समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते आवश्यक उपचार और रक्त उपलब्ध करा दिया जाता, तो युवती की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल प्रशासन ने दी अलग जानकारी
दूसरी ओर जिला अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को लेकर अलग पक्ष रखा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई गई थीं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार मौत के वास्तविक कारणों और उपचार प्रक्रिया की समीक्षा के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सिकल सेल एनीमिया बनी गंभीर चुनौती
सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर में सामान्य लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है। छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह बीमारी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मरीजों के लिए समय पर रक्त और विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
युवती की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की बात कही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर फिर उठी बहस
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, रक्त उपलब्धता और गंभीर मरीजों के उपचार प्रबंधन को लेकर बहस छेड़ दी है। आम लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
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