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महंगाई का एक और झटका: घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपए महंगा, आज रात से लागू हुई नई कीमतें…

नई दिल्ली

तीन महीने में दूसरी बार बढ़े एलपीजी के दाम, रसोई का बजट बिगड़ने की आशंका
हेडलाइंस

नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें शनिवार रात 12 बजे से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपए से बढ़कर 942 रुपए हो गई है। बढ़ी हुई कीमतों का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम

एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में पिछले तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 60 रुपए की वृद्धि की गई थी। उस बढ़ोतरी से पहले दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपए में उपलब्ध था। लगातार बढ़ रही कीमतों ने आम परिवारों की रसोई का खर्च बढ़ा दिया है।

तेल कंपनियों ने बताई कीमत बढ़ाने की वजह

सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की बढ़ती कीमतों और घरेलू बिक्री पर हो रहे नुकसान के कारण यह निर्णय लिया गया है। कंपनियों का दावा है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर उन्हें प्रति सिलेंडर लगभग 703 रुपए का नुकसान हो रहा था। हालिया बढ़ोतरी के बाद भी इस नुकसान की केवल आंशिक भरपाई ही हो सकेगी।

छोटे सिलेंडर भी हुए महंगे

घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों पर भी इसका असर पड़ा है। पांच किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 11 रुपए की वृद्धि की गई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 821.50 रुपए हो गई है। इससे निम्न आय वर्ग और छोटे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ने की संभावना है।

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के बाद अब एलपीजी महंगी

पिछले कुछ सप्ताहों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मई महीने के दौरान कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई, जबकि सीएनजी लगभग 6 रुपए प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। ऐसे में परिवहन से लेकर घरेलू खर्च तक कई क्षेत्रों पर महंगाई का असर दिखाई देने लगा है।

कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की दरें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, आयात लागत, परिवहन, बॉटलिंग और वितरण खर्च को ध्यान में रखकर कीमतें तय की जाती हैं। इसके अलावा सरकार की सब्सिडी और कर संबंधी नीतियां भी गैस सिलेंडर की अंतिम कीमत को प्रभावित करती हैं।

उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ती ईंधन और रसोई गैस की कीमतों के बीच आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेजी बनी रहती है तो आने वाले समय में घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ सकता है।

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