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छत्तीसगढ़ में जनगणना-2027 की शुरुआत: 1 मई से होगा पहला चरण, पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क

मुख्य बिंदु (Highlight Box):

तैयारियां पूरी, अधिकारियों ने दी जानकारी
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत 1 मई से होने जा रही है, जिसकी सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान जनगणना कार्य निर्देशक कार्तिकेय गोयल भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया राज्य के विकास और योजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।

सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा से लोगों को राहत
इस बार जनगणना में आम नागरिकों को भी सुविधा दी गई है कि वे 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपने परिवार और घर की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसे ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ कहा गया है। जो लोग यह प्रक्रिया अपनाएंगे, उन्हें एक यूनिक आईडी प्राप्त होगी, जिसे बाद में जनगणना कर्मचारियों को दिखाना अनिवार्य होगा। इससे समय की बचत के साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

पहले चरण में घर-घर जाकर होगी जानकारी एकत्रित
जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर परिवार, मकान और बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। प्रगणक घर-घर जाकर कुल 33 प्रश्नों के माध्यम से जानकारी जुटाएंगे। राज्य में इस कार्य के लिए 62,500 अफसर-कर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें जनगणना अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं।

पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना प्रक्रिया
इस बार की जनगणना को खास बनाता है इसका पूरी तरह डिजिटल होना। पहली बार डेटा मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज किया जाएगा और इसकी निगरानी भी डिजिटल सिस्टम से होगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि नागरिकों की सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि यह स्वतंत्रता के बाद देश की 8वीं और कुल 16वीं जनगणना होगी, जबकि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी।

योजनाओं के निर्माण में मिलेगी मदद
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो सरकार को जनसंख्या, आवास और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन करने में मदद करती है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी, समावेशी और जनहितकारी बनाई जा सकती हैं। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को विकास की रीढ़ माना जाता है।

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