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बिलासपुर में अवैध निर्माण पर बवाल: स्थगन आदेश के बावजूद काम जारी, निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

बिलासपुर / छत्तीसगढ़

हाइलाइट :
• वार्ड 19, रिंग रोड-02 में अवैध निर्माण का आरोप
• तहसीलदार के स्थगन आदेश के बावजूद जारी कार्य
• शिकायतकर्ता ने निगम प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया
• मामला कोर्ट में लंबित, दस्तावेजों में गड़बड़ी के भी आरोप

अवैध निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद

बिलासपुर नगर निगम के रिंग रोड नंबर-02 स्थित वार्ड क्रमांक 19 में अवैध निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राजकिशोर नगर निवासी अविनाश पेसवानी ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि नर्मदा नगर निवासी सुरेश कुमार वाजपेयी द्वारा बिना अनुमति के व्यावसायिक निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर पालिका निगम अधिनियम, 1956 के तहत यह निर्माण पूरी तरह अवैध है, इसके बावजूद संबंधित विभाग कार्रवाई करने से बच रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थगन आदेश के बावजूद जारी निर्माण

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस विवादित भूमि पर तहसीलदार द्वारा पहले ही स्थगन आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय लगातार जारी है। अविनाश पेसवानी ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत नगर निगम में की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 24 फरवरी 2026 को संबंधित व्यक्ति ने प्रपोजल क्रमांक 15014 के तहत ऑनलाइन आवेदन किया, फिर भी बिना अनुमति के निर्माण चलता रहा। नायब तहसीलदार सकरी ने 30 मार्च 2026 को जांच पूरी होने तक निर्माण पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया, जिसकी प्रति 1 अप्रैल को निगम के भवन शाखा को भेजी गई थी।

■ जमीन विवाद और दस्तावेजों पर गंभीर आरोप

मामले में जमीन के दस्तावेजों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 448/49, 448/50, 448/53 और 448/67 की लगभग 4000 वर्गफुट भूमि में से एक हिस्से को कथित रूप से फर्जी तरीके से पटवारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया है। इस विवाद को लेकर जिला न्यायालय में भी मामला लंबित है। अविनाश पेसवानी का कहना है कि अन्य मामलों में निगम तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में कथित प्रभाव के चलते अनदेखी की जा रही है।

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल

स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य पूरी तरह बंद न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की शिकायत नगर निगम आयुक्त से भी की है और अवैध निर्माण पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे कानून व्यवस्था और प्रशासन की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

पक्ष जानने का प्रयास, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया

इस मामले में सुरेश कुमार वाजपेयी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। ऐसे में पूरे मामले में एकतरफा आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है। अब देखना होगा कि नगर निगम और प्रशासन इस गंभीर विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।

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