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पश्चिम एशिया तनाव पर भारत की सक्रिय कूटनीति, जयशंकर-ईरान राजदूत बैठक से लेकर पीएम मोदी की सख्त प्रतिक्रिया…

मुख्य बातें

कूटनीतिक सक्रियता तेज, भारत ने निभाई संतुलित भूमिका

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर ने इस दौरान ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को दिए जा रहे सहयोग की सराहना की और चुनौतीपूर्ण समय में आपसी संवाद को महत्वपूर्ण बताया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बना हुआ है।

पीएम मोदी और ईरान राष्ट्रपति की बातचीत, शांति की अपील

इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत कर ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई कि यह पर्व क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे कदम न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

ऊर्जा संकट और व्यापार पर असर, भारत ने रखी स्पष्ट नीति

राज्यसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बताया कि तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और व्यापारिक मार्ग बाधित हो रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्गों में बाधा डालना अस्वीकार्य है। सरकार का कहना है कि भारत लगातार कूटनीतिक संवाद के माध्यम से तनाव कम करने और क्षेत्र में जल्द शांति स्थापित करने के प्रयासों में जुटा हुआ है।

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