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तेहरान पर भीषण हमले के बाद मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात, सैकड़ों मौतों से दहला ईरान…

तेहरान / विदेश

मुख्य बिंदु

तेहरान समेत कई शहरों पर बड़ा हमला, सैकड़ों की मौत

शनिवार सुबह मध्य-पूर्व में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान सहित 10 प्रमुख शहरों पर व्यापक एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में रिहायशी इलाकों, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार इन हमलों में कम से कम 201 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 747 से अधिक लोग घायल हुए हैं। तेहरान, इस्फहान, मशहद और तबरीज़ जैसे शहरों में विस्फोटों की गूंज कई घंटों तक सुनाई देती रही। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, हमले अचानक और बेहद तीव्र थे, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और खून की भारी जरूरत बताई जा रही है।

स्कूल पर मिसाइल, मासूमों की मौत से देश में आक्रोश

इन हमलों की सबसे दर्दनाक तस्वीर तेहरान के एक स्कूल से सामने आई, जहां मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हो गईं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि स्कूल की इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया। बचावकर्मियों ने घंटों मलबा हटाकर छात्राओं को बाहर निकाला। सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें वायरल होने के बाद देशभर में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। कई जगहों पर नागरिकों ने इजराइल और अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने स्कूलों और रिहायशी इलाकों पर हमले को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत का दावा

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजराइली हमले में ईरान के रक्षामंत्री अमीर नासिरजादेह और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की मौत हो गई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह ईरान की सैन्य संरचना के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के नेतृत्व को निशाना बनाना इजराइल की रणनीतिक योजना का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य कमान और समन्वय क्षमता को कमजोर करना है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के हमले क्षेत्रीय संघर्ष को पूर्ण युद्ध की दिशा में धकेल सकते हैं।

ट्रम्प का बयान और अमेरिका की भूमिका

हमलों के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों और हितों की सुरक्षा के लिए की गई है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में यह कदम जरूरी था। हालांकि अमेरिका की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति और आधिकारिक नीति पर अभी भी कई प्रश्न बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस संयुक्त कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के कई नेताओं ने संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई, क्षेत्र में युद्ध का खतरा

हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के सबसे अधिक आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में दहशत फैल गई। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके परिणाम दूरगामी और विनाशकारी हो सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व पर टिकी हैं, जहां हर गुजरता घंटा नई आशंका और अनिश्चितता लेकर आ रहा है।

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