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बिलासपुर में VSK ऐप पर रोक: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का बड़ा अंतरिम आदेश…

बिलासपुर / छत्तीसगढ़
बिलासपुर: प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने VSK ऐप को अनिवार्य रूप से इंस्टॉल कराने और इसे लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस एन. के. चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय कार्रवाई नहीं की जाएगी।

याचिका पर सरकार को नोटिस
यह याचिका शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन द्वारा दायर की गई है, जिसमें VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। उन्होंने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए तर्क दिया कि शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए अनिवार्य रूप से नहीं कराया जा सकता।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश फिलहाल केवल याचिकाकर्ता के संदर्भ में लागू है, हालांकि मामले का व्यापक प्रभाव प्रदेश के अन्य शिक्षकों पर भी पड़ सकता है।


VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं’
अंतरिम आदेश में न्यायालय ने कहा है कि अगली सुनवाई तक राज्य सरकार शिक्षकों को VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं करेगी और इस मुद्दे को लेकर किसी भी शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस आदेश का लाभ सभी शिक्षकों को स्वतः मिलेगा या नहीं।


क्या है VSK एप्लिकेशन?
VSK ऐप एक डिजिटल एप्लिकेशन है, जिसे शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों की मॉनिटरिंग और प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इसके माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करना, स्कूल गतिविधियों की रिपोर्टिंग, फोटो अपलोड, निरीक्षण संबंधी जानकारी और शैक्षणिक कार्यों की निगरानी की जाती है।
छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में इसे शिक्षकों के मोबाइल पर इंस्टॉल कर दैनिक जानकारी अपडेट करने के लिए लागू किया गया है। इसी अनिवार्यता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले की दिशा स्पष्ट होगी।

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