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बिलासपुर कांग्रेस में फिर उभरी गुटबाजी, मनरेगा मंच से प्रभारी-प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीरें गायब; जिलाध्यक्ष को नोटिस…

हाइलाइट बॉक्स

बिलासपुर में कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आई है। मनरेगा बचाओ संग्राम के दौरान पार्टी के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीरें बैनर-पोस्टर से गायब मिलने पर प्रदेश कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है।

संगठन सृजन के बीच बढ़ता टकराव

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि नए जिलाध्यक्ष मिलकर संगठन को मजबूती देंगे। लेकिन बिलासपुर में हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। जिले में गुटबाजी कम होने के बजाय और गहराती दिख रही है। अब यह खींचतान सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि प्रदेश स्तर की राजनीति तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। कई पदाधिकारी पार्टी लाइन से हटकर अपने हिसाब से फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं, जिससे संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मनरेगा बचाव संग्राम बना विवाद की वजह

बीते दिनों कोटा ब्लॉक में आयोजित मनरेगा बचाओ महासंग्राम के दौरान विवाद तब खड़ा हुआ, जब मंच और बैनर से एआईसीसी महासचिव व प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीरें नदारद पाई गईं। कार्यक्रम में एआईसीसी सचिव व सह प्रभारी विजय जांगिड़ और अभियान के प्रदेश समन्वयक उमेश पटेल जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसके बावजूद शीर्ष नेतृत्व की तस्वीरों को हटाया जाना प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर अनुशासनहीनता माना। इसी आधार पर पीसीसी संगठन महामंत्री की ओर से जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

चेतावनियों के बावजूद नहीं बदला रवैया

कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों को छह-छह महीने के परीक्षण कार्यकाल पर नियुक्त कर उनके कामकाज की नियमित समीक्षा का फैसला लिया है। इसके तहत संगठनात्मक सक्रियता, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाना है। बावजूद इसके, बिलासपुर में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। हाल ही में एक सड़क हादसे में कांग्रेस नेता सहित दो लोगों की मौत और मस्तूरी ब्लॉक अध्यक्ष के गंभीर रूप से घायल होने के बीच जिलाध्यक्ष द्वारा होटल में भोज आयोजन की चर्चा ने भी संगठन को असहज कर दिया है। इस संवेदनहीनता की बातें राजधानी तक पहुंच चुकी हैं और इसे लेकर पार्टी के भीतर असंतोष साफ झलक रहा है।

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