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छत्तीसगढ़ में शीतलहर का कहर, तापमान 1.8 से गिरा, स्कूल बंद; स्वास्थ्य खतरे बढ़े…

मुख्य बिंदु:

तापमान में गिरावट और विद्यालयों पर प्रभाव

मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ के उत्तरी व मध्य हिस्सों में शीतलहर चलने की संभावना जताई है, जिससे कई शहरों का तापमान 10°C से नीचे दर्ज किया गया है। मैनपाट में न्यूनतम तापमान 1.8°C रिकॉर्ड हुआ, वहीं अंबिकापुर में रात का तापमान 3.3°C तक गिर गया। रायपुर 6.6°C, पेंड्रा 7.6°C, दुर्ग व राजनांदगांव 8°C व जगदलपुर 8.4°C तापमान के साथ ठंड की चपेट में हैं। इसके कारण सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया व गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में 10 जनवरी तक प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और दो पालियों वाले स्कूलों का समय सुबह 9:30 बजे से निर्धारित किया गया है।

स्वास्थ्य असर: हाइपोथर्मिया, ओपीडी भीड़ और एडवाइजरी

ठंड के चलते स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी की है कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे व क्रॉनिक मरीज अधिक प्रभावित हो सकते हैं। अंबिकापुर में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई, जबकि पिछले माह भी एक व्यक्ति की इसी कारण मृत्यु हुई थी। रायपुर के निजी व सरकारी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिससे कुछ बच्चों को NICU/SNCU में भर्ती करना पड़ा है। सर्दी–जुकाम व वायरल फीवर के मरीजों की ओपीडी में भी भारी भीड़ दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, केवल आवश्यक यात्रा करने और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

अन्य जोखिम: मलेरिया की संभावना और बचाव उपाय

मौसम में निरंतर बदलाव के कारण मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार दिन का तापमान 33–39°C और रात का 14–19°C मच्छरों के अनुकूल होता है, जिससे ग्रामीण एवं जंगल क्षेत्रों में संक्रमण का जोखिम आठ दिनों तक अधिक रहेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मच्छरदानी, जल जमाव न होने देने, घर में जालियाँ लगाने, पूर्ण आस्तीन वाले कपड़े पहनने व लक्षण दिखते ही ब्लड टेस्ट कराने का आग्रह किया है। साथ ही सर्द मौसम में विटामिन C युक्त आहार, गर्म चाय एवं भाप लेने जैसी सामान्य सावधानियाँ भी जरूरी बताई हैं।

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