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जनकल्याणकारी योजनाओं से कबीरधाम की महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर, मछली पालन से बढ़ाई परिवार की आमदनी…

हाइलाइट बॉक्स

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को मिला प्रशिक्षण व मार्गदर्शन, बिहान योजना से प्राप्त ऋण ने खोले स्वरोजगार के द्वार, बोड़ला विकासखंड की महिलाएँ बनीं लखपति दीदी, मछली पालन से आर्थिक मजबूती, बढ़ा आत्मविश्वास व सामाजिक सम्मान

बिहान और बिहान से मिली नई पहचान

कबीरधाम जिले में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएँ अब महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव ला रही हैं। महिलाएँ, जो कभी सिर्फ घर की चौखट तक सीमित थीं, अब प्रशिक्षण और विभागीय सहायता के सहारे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का अवसर दिया। इस मिशन से जुड़कर कई महिलाएँ लखपति दीदी के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

मछली पालन बना आमदनी का मजबूत आधार

बोड़ला विकासखंड के बोड़ला ब्लॉक की जय सतनाम स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हेमिन रात्रे और श्रीमती मीना रात्रे इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित मछली पालन का प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग मिला। सामुदायिक तालाब में वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन की शुरुआत की गई, जहाँ नियमित देखभाल और समय पर पोषण आहार देने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मछलियों की बिक्री से उन्हें स्थायी और बेहतर आमदनी मिलने लगी, जिससे वे न सिर्फ घर का खर्च सहजता से चला रही हैं, बल्कि बचत भी कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए यह मॉडल अब एक सफल आजीविका विकल्प के रूप में उभर रहा है।

आर्थिक मजबूती से बढ़ा सम्मान और आत्मविश्वास

लखपति दीदी बनने की यात्रा ने इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति ही नहीं बदली, बल्कि समाज में उनका सम्मान, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। हेमिन और मीना बताती हैं कि पहले काम करने की इच्छा तो थी, लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आती रही। स्व-सहायता समूह और बिहान योजना से ऋण सहायता मिलने के बाद उन्होंने हौसला जुटाया और मछली पालन शुरू किया, जो आज उनकी आत्मनिर्भरता का मुख्य स्तंभ बन गया है। अब वे परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए, घर की आर्थिक मजबूती में भी बराबर की हिस्सेदारी कर रही हैं। रिश्तेदारों और समाज के बीच उनकी बदली हुई छवि ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।

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