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मोहन भागवत बोले: संकटों का समाधान हमारे अपने हाथ में, स्वदेशी अपनाएं और संविधान का सम्मान करें …

रायपुर/छत्तीसगढ़
रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सोनपैरी में आयोजित हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने अपने उद्बोधन में देश, समाज, संस्कृति और नागरिक कर्तव्यों को लेकर व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि आज दुनिया में अनेक प्रकार के संकट दिखाई देते हैं, लेकिन उनके समाधान हमारे अपने हाथ में हैं। यदि व्यक्ति और समाज सशक्त रहेगा, तो कोई भी संकट हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

भागवत ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। नागपुर से शुरू हुआ यह संगठन आज पूरे देश में समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ की नींव त्याग और सेवा पर रखी गई थी और कार्यकर्ताओं के परिश्रम से यह लगातार मजबूत होता गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक प्राचीन और समृद्ध विचार परंपरा वाला देश है, जहां संतों और महापुरुषों की परंपरा आज भी जीवित है, इसलिए भारतीय समाज के पास हर चुनौती का समाधान मौजूद है।

RSS प्रमुख ने समाज और परिवार में बढ़ते संस्कारहीनता, नशे की प्रवृत्ति, पर्यावरण संकट और भेदभाव जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भाषा, वेशभूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन जैसे सांस्कृतिक तत्वों को घर-परिवार में अपनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अपने देश में निर्मित उत्पादों को खरीदने से रोजगार भी बढ़ेगा और देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई वस्तु देश में न बने तो आवश्यकता अनुसार ही बाहर से खरीदी जानी चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. भागवत ने संविधान, नियम-कानून और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर टैक्स भरना, ट्रैफिक नियमों का पालन करना और सामाजिक जिम्मेदारियां निभाना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही आदतें राष्ट्र को सशक्त बनाती हैं और समाज को सही दिशा देती हैं।

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