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कोलकाता से अपडेट: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तनाव से मौतों और तनाव की बढ़ती घटनाएं…

कोलकाता

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूची में संशोधन और सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर चिंता, तनाव और भय का वातावरण बन गया है। राज्य के कई इलाकों से बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) और मतदाताओं के बीच तनाव, स्वास्थ्य प्रभावित होने और मौतों की घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बुज़ुर्ग मतदाताओं में भय और स्वास्थ्य समस्या
SIR सुनवाई के लिए आए बुजुर्ग मतदाताओं की कतारों में लंबा इंतजार करने के कारण कई लोगों के स्वास्थ्य प्रभावित हुए। 96 वर्ष के निखिल चंद्र सरकार और 90 वर्ष की मुक्तिबाला परमानिक जैसी वृद्धा भी सुनवाई केंद्रों पर अपनी physical limitations के बीच कठिनाइयों का सामना कर रही थीं।
इसी तरह, गर्भवती महिला और एक युवती अपने छोटे बच्चे के साथ सुनवाई के लिए आए, जिनके परिवारीय बयानों से पता चलता है कि अधिकांश लोग केवल SIR नोटिस और सुनवाई प्रक्रिया के डर, भ्रम और स्वास्थ्य संकट से तनाव में थे।

SIR प्रक्रिया पर व्यापक तनाव और आलोचना
Election Commission की SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को दस्तावेजों की सत्यता के साथ अपडेट करना और त्रुटियों को हटाना है, जिसमें राज्य भर से draft voter list में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनके कारणों में मौत, स्थानांतरण, लापता होना और डुप्लीकेट रिकार्ड शामिल हैं। आयोग ने दावा किया है कि हटाए गए नामों को वापस लाने या आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया जाएगा।

हालांकि, SIR सुनवाई में बुज़ुर्गों, विकलांगों और बीमार नागरिकों को बुलाए जाने पर विवाद बढ़ा है। राजनीतिक दलों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने आलोचना करते हुए कहा है कि सुनवाई को घर-घर जाकर करने का आदेश स्पष्ट नहीं है, और कई को आवश्यकता होने पर भी सुविधा नहीं मिली है।

स्थिति का व्यापक परिप्रेक्ष्य
राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर नाम हटाए जाने, सुनवाई के लिए बड़ी संख्या में बुलाए जाने और स्वास्थ्य तथा मानसिक दबाव के कारण मौतें तथा तनाव की घटनाओं ने इस अभ्यास को तात्कालिक चिंता के विषय के रूप में स्थापित किया है। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें अपील/आपत्ति की प्रक्रिया से गुजरना होता है, लेकिन इस बीच गलतफहमी, प्रशासनिक कठिनाइयों और संचार की कमी ने भय और भ्रम की स्थिति और बढ़ा दी है।

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