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क्या सड़कों से हटेंगे अब आवारा पशु ? छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ एक माह का विशेष अभियान , टोल-फ्री नंबर से होगी त्वरित कार्रवाई |

हाइलाइट :सड़कों पर आवारा पशुओं से हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लगाने राज्य सरकार की बड़ी पहल नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी जिलों को 1 माह तक विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश टोल-फ्री नंबर 1033 और निदान-1100 पर तुरंत दर्ज कर सकेंगे शिकायत पशु मालिकों को खुले में पशु नहीं छोड़ने की दी चेतावनी , कार्रवाई भी होगी सख्त |

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला आवारा पशुओं से सड़क दुर्घटनाएं रोकने विशेष अभियान

रायपुर , 4 नवम्बर 2025 | स्वतंत्र छत्तीसगढ़ न्यूज़ — छत्तीसगढ़ में सड़कों पर आवारा और घुमंतू पशुओं के कारण बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अब बड़ा कदम उठाया है । नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को एक माह तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं । इस अभियान के तहत आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों — जैसे गौशाला , गौठान और कांजी हाउस — में स्थानांतरित किया जाएगा । विभाग ने सभी कलेक्टरों , नगर निगम आयुक्तों , नगर पालिका और नगर पंचायतों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे परिवहन विभाग की मानक संचालन प्रक्रिया SOP के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें । साथ ही , टोल-फ्री नंबर 1033 राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और निदान-1100 नगरीय निकाय का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी आदेश दिए गए हैं , ताकि आम नागरिक तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें ।

सड़क सुरक्षा और निगरानी के लिए बनेगा विशेष नियंत्रण तंत्र

परिवहन विभाग की SOP के अनुसार , राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर सुरक्षा और निगरानी के लिए निगरानी दल Monitoring Teams बनाए जाएंगे । ये दल सड़क पर घूमते आवारा पशुओं की पहचान कर उन्हें काउ-कैचर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएंगे । नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को High Risk Areas और Moderate Risk Zones की मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं , ताकि दुर्घटना संभावित स्थानों पर पहले कार्रवाई की जा सके । विभाग ने यह भी कहा है कि पशु मालिकों को नोटिस देकर कानूनी कार्रवाई की जाए , ताकि वे भविष्य में अपने पशुओं को खुले में न छोड़ें ।

पशु मालिकों पर सख्त कार्रवाई और रेडियम पट्टियों से बढ़ेगी

रात की सुरक्षा विभाग ने पशुपालन विभाग को निर्देशित किया है कि खुले में विचरण करने वाले पशुओं को रेडियम स्ट्रिप लगाई जाए , ताकि रात के समय वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशु साफ दिखाई दें । साथ ही , चिन्हित मार्गों पर स्ट्रीट लाइट और चेतावनी बोर्ड लगाने के भी आदेश दिए गए हैं । विभाग का कहना है कि यदि पशु मालिक नियमों का पालन नहीं करते , तो उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी । इस दौरान जनता को सोशल मीडिया और जन-जागरूकता शिविरों के माध्यम से बताया जाएगा कि सड़कों पर पशुओं को छोड़ना न केवल खतरनाक है , बल्कि कानूनन अपराध भी है ।

ग्रामीण इलाकों में भी चलेगा अभियान

यह अभियान सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा । विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यह विशेष अभियान शहरों के आसपास 10 से 15 किलोमीटर की परिधि में आने वाले ग्रामीण इलाकों में भी चलाया जाए । इसके लिए ग्राम पंचायतों का सहयोग लिया जाएगा । ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशु मालिकों को जागरूक किया जाएगा कि वे अपने पशुओं को सड़कों पर नहीं छोड़ें ।

शिकायतों के लिए दो प्रमुख टोल-फ्री नंबर

नगरीय प्रशासन विभाग ने कहा है कि नागरिक सड़क पर घूमते पशुओं या उनसे उत्पन्न खतरे की शिकायत 1033 NHAI और 1100 निदान पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं । इन शिकायतों की जानकारी निगरानी दलों तक तत्काल पहुंचाई जाएगी और उनकी साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी । सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया गया है कि वे की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हर सप्ताह क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों के माध्यम से संचालनालय को भेजें ।

सरकार का उद्देश्य सुरक्षित सड़कें , जिम्मेदार नागरिक

नगरीय प्रशासन विभाग का यह अभियान न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास है , बल्कि यह नागरिकों को जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है । विभाग का मानना है कि जब तक नागरिक और पशु मालिक मिलकर सहयोग नहीं करेंगे , तब तक सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती । राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि यह एक माह का अभियान छत्तीसगढ़ की सड़कों को सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ।

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