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छत्तीसगढ़ को मिला 1685 करोड़ का पेंशन अंशदान, अब हर साल होगी 200 करोड़ की बचत…

रायपुर : 01 अगस्त 2025

वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद तय हुआ था कि विभाजन से पहले मध्यप्रदेश में की गई सेवा के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन का 73.38% हिस्सा मप्र और 26.62% हिस्सा छत्तीसगढ़ देगा।

हालांकि, जांच में सामने आया कि मध्यप्रदेश सरकार वर्षों से अपना हिस्सा नहीं दे रही थी। यह गलती तब उजागर हुई जब छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशन रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज किया। इसके बाद मप्र से 2024-25 के लिए 1685 करोड़ की पेंशन राशि की मांग की गई, जिसे हाल ही में जमा किया गया है।

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अब हर महीने मध्यप्रदेश सरकार को उसके हिस्से की राशि की डिमांड भेजी जा रही है। सिर्फ तीन महीने (अप्रैल-जून 2025) में ही छत्तीसगढ़ सरकार को 600 करोड़ की बचत हुई है। आगे हर साल 150-200 करोड़ रुपए की स्थायी बचत संभावित है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसे तकनीक, डेटा और इच्छाशक्ति की जीत बताया। संचालनालय प्रमुख रितेश अग्रवाल के अनुसार, 1.4 लाख पुराने पीपीओ को स्कैन कर एआई तकनीक से डेटा विश्लेषण किया गया, जिससे यह गड़बड़ी पकड़ में आई।

पेंशन संचालनालय अब पुराने सालों का भी लेखा-जोखा जांच रहा है, जिससे अनुमान है कि मध्यप्रदेश से 25 हजार करोड़ तक की और देनदारी बन सकती है।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की आर्थिक व्यवस्था को मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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