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छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण गठन का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने की समय-सीमा तय की…

बिलासपुर : 20जुलाई 2025

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को राज्य में भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण का गठन दो माह के भीतर करने का सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में प्राधिकरण गठित नहीं हुआ तो राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बाबूलाल द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कहा गया था कि राज्य में 2018 से प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ, जिससे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान और ज़मीन मालिक मुआवजा व ब्याज के लिए भटक रहे हैं।

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राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन कोर्ट ने इसे असंतोषजनक माना। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने कहा कि अब यह कार्य और टालने योग्य नहीं है।

2018 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत भूमि अधिग्रहण अधिकारी को एक वर्ष के भीतर विवाद सुलझाना होता है। यदि ऐसा न हो तो व्यक्ति प्राधिकरण में अपील कर सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में प्राधिकरण नहीं होने से सैकड़ों मामले लंबित हैं। इससे पहले हाईकोर्ट ने बाबूलाल की जनहित याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि यह जनहित का मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों के हक सुरक्षित रहेंगे और वे मुआवज़े या ब्याज से वंचित नहीं होंगे।

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