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बीजापुर में IED ब्लास्ट: जवानों को निशाना बनाने के लिए लगाया बम, ग्रामीण आए चपेट में…

बीजापुर, 14 जुलाई 2025

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर माओवादियों की कायराना हरकत सामने आई है। मद्देड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत धनगोल गांव के पास नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से चार ग्रामीण घायल हो गए। घायल ग्रामीणों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

मद्देड़ थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार माओवादियों ने बंदेपारा की ओर जाने वाले रास्ते पर जमीन के नीचे IED प्लांट किया था। रविवार सुबह कुछ ग्रामीण इसी रास्ते से दूसरे गांव की ओर जा रहे थे, तभी उनमें से एक का पैर IED पर पड़ते ही जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके में एक ग्रामीण का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया, जबकि तीन अन्य को मामूली चोटें आई हैं।

घायलों को पहले मद्देड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बीजापुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। बीजापुर के एसडीओपी मयंकरण सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी घायलों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।

सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश

स्थानीय पुलिस और खुफिया सूत्रों के अनुसार नक्सलियों ने यह बम सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के इरादे से लगाया था। लेकिन ग्रामीण अनजाने में उसकी चपेट में आ गए। माओवादियों द्वारा IED बम प्लांटिंग की यह रणनीति सुरक्षा बलों के मूवमेंट को बाधित करने के लिए लगातार अपनाई जा रही है।

पिछले महीनों में बढ़ी IED घटनाएं

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में माओवादी हमलों में खासकर IED ब्लास्ट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिनमें सुरक्षा बलों के जवान और आम नागरिक घायल या शहीद हुए हैं।

IED ब्लास्ट की प्रमुख घटनाएं (2024–2025):

माओवादी लंबे समय से IED को अपनी प्रमुख रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हमला तकनीकी रूप से कम संसाधनों में अधिक नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किया जाता है। अक्सर ग्रामीणों की आवाजाही वाले रास्तों, सुरक्षा बलों की पेट्रोलिंग रूट या जंगलों के भीतर ऐसे विस्फोटक बिछाए जाते हैं।

बड़े हमलों की सूची:

लगातार हो रहे इन IED हमलों से सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आधुनिक उपकरणों और ट्रैकिंग तकनीकों के बावजूद, माओवादियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम या रिमोट IED कई बार सुरक्षा बलों की नजरों से बच जाते हैं। इनमें से कई बम जंगलों में पैदल चलने वाले ग्रामीणों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में बार-बार हो रहे इन धमाकों ने आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बम की चपेट में आने वाले अधिकतर लोग ग्रामीण पथों से गुजरते समय अनजाने में शिकार बन जाते हैं। बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा जैसे जिलों में स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील बनी हुई है।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार और सुरक्षा बलों से अपील की है कि IED जैसे खतरों को रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और स्थानीय जानकारी का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत बताई जा रही है ताकि वे संदिग्ध वस्तुओं या जगहों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

बीजापुर में हालिया IED विस्फोट न केवल माओवादियों की बर्बर मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे इस हिंसा का सबसे बड़ा शिकार आम निर्दोष ग्रामीण बन रहे हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को केवल सख्त कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और सतर्क रणनीति भी अपनानी होगी। साथ ही, स्थानीय जनसंख्या के सहयोग और जागरूकता के बिना इस चुनौती का समाधान असंभव है।

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